निबंध भाषण

बिटकॉइन क्या है, निवेश कैसे करें, भविष्य – हिंदी जानकारी

what is bitcoin in hindi essay

बिटकॉइन आजकल एक बहोत बड़ी चर्चा का विषय बन चूका है| कोई इसे पैसा निवेश करने का बहुत बड़ा मौका मान रहा है तो कोई इसे पोंज़ी, पिरामिड स्कीम बोल रहां है| इस लेख में हमने कोशिश की है बिटकॉइन के बारेमे ज्यादा से ज्यादा जानकारी आपको सिंपल हिंदी में दे| यहाँ हम जानेंगे आखिर क्या है बिटकॉइन (व्हाट इस बिटकॉइन?), इसमें निवेश कैसे कर सकतें है? इसमें क्या जोखिम है? क्या है इसके फायदे और नुकसान कैसे हो सकता है? कितने तरह के बिटकॉइंस है? उनका डेली रेट कैसे चेक करें? जानिये इसका का इतिहास और भविष्य.

क्या है बिटकॉइन? What is Bitcoin in Hindi

बिटकॉइन एक मौद्रिक प्रणाली या डिजिटल मुद्रा का रूप है जो पीयर-टू-पीयर टेक्नोलॉजी का उपयोग करता है| यह विकेन्द्रीकृत मुद्रा है, इसका मतलब, बिटकॉइन किसीभी केंद्रीय या इतर बैंको द्वारा संचालित नहीं होती| इसे बनाने का यह एक मुख्य कारण था, इसे कोई भी सरकार या बैंक के नियंत्रण से दूर रखा जाए| यह वर्तमान मुद्रा को चुनौती देता है जो पूरी तरह से सरकार और केंद्रीय बैंकोंके नियंत्रण में रहती है| इसका निर्माण सातोशी नाकामोतो नामक एक व्यक्ति या ग्रुप ने किया है, यह उसका असली नाम नहीं है| सातोशी नाकामोतो की असली पहचान अभी तक नहीं हुई है|

बिटकॉइन एक वर्चुअल करेंसी है, इसका मतलब आप इसको देख नहीं सकते, छु नहीं सकते| इसका कोई भौतिक रूप नहीं है, यह एक बहुत ही जटिल कंप्यूटर अल्गोरिथम पर चलता है| यह आपके डिजिटल वॉलेट में रहता है| क्योंकि यह मुद्रा सरकार द्वारा संचालित नहीं है, इसमें आपको कोई भी फ्रॉड प्रोटेक्शन, निवेश करनेपर टैक्स से राहत आदि नहीं मिलती (आजकल कुछ क्रिप्टोकरेंसी एक्सचैंजेस ऐसी कुछ सुविधाएँ देते है, पर अभी तक स्टैण्डर्ड नहीं बना है)| हर देश में इससे रूल्स और गाइडलाइन्स अलग अलग होतें है|

जैसे इंडिया में यह बिटकॉइन लीगल है पर रेगुलेटेड नहीं है, इसका मतलब की यह भारतीय सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त मुद्रा नहीं है| वित्त मंत्री अरुण जेटली ने १ फेब्रुअरी २०१८ के अपने बजट भाषण में कहाँ, “सरकार क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी निविदा (Legal Tender) के रूप में पहचानती नहीं है और गैर-कानूनी गतिविधियों के वित्तपोषण में या भुगतान प्रणाली के हिस्से के रूप में इन क्रिप्टो संपत्तियों के इस्तेमाल को समाप्त करने के लिए सभी उपाय करेगी”|

जानिये बिटकॉइन का इतिहास – History of Bitcoin

बिटकॉइन: ए पीर-टू-पीयर इलेक्ट्रॉनिक कैश सिस्टम नामक व्हाइट पेपर नवंबर २००८ को सातोशी नाकामोतो ने इंटरनेट पे पब्लिश किया गया| ऐसा कहा जाता है की सातोशी एक जापानी कंप्यूटर साइंस और क्रिप्टोकरेंसी एक्सपर्ट है, पर वह अभी भी एक रहस्य बने हुए है| किसीको बता नहीं के यह उनका असली नाम भी है की नहीं| क्रेग स्टीफन राइट के नाम के एक ऑस्ट्रेलियाई प्रोग्रामर ने सातोशी होने का दावा किया है, हालांकि उसने अभी तक इस दावे का कोई सबूत नहीं दिया है।

जनवरी २००९ में, नाकामोतो ने पहला बिटकॉइन सॉफ्टवेयर जारी किया| उन्होंने इसका नेटवर्क और डिजिटल क्रिप्टोकरेंसी की पहली यूनिट स्थापित कीं जिन्हें बिटकॉइंस (bitcoin) कहा जाता है।

यह माना जाता है कि बिटकॉइन पर काम २००७ में शुरू हुआ था, और अंत में डेवलपर्स की मदद से bitcoin.org नामक वेबसाइट बनायी।(यह डोमेन सातोशी नाकामोतो और मार्त्ति मलमी नामक डेवेलपर्स ने ख़रीदा था| सातोशी ने बिटकॉइन प्रोजेक्ट छोड़ने के बाद इसकी ओनरशिप दूसरे लोगों को दी ताकि कोई एक आदमी इसपे नियंत्रण न कर सकें| bitcoin.org बिटकॉइन की ऑफिसियल वेबसाइट नहीं हैं)| २०१० के मध्य में, नाकामोतो ने एक कंप्यूटर विज्ञान विशेषज्ञ और प्रिंसटन विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट, गैविन एंड्रेसेन को सोर्स कोड रिपॉजिटरी और नेटवर्क अलर्ट की का नियंत्रण सौंप दिया। इसके बाद बिटकॉइन परियोजना में नाकामोतो की भागीदारी समाप्त हुई।

बिटकॉइन ने पहले वेस्टर्न देशोमे जोर पकड़ा, और अब यह पूरी दुनिआ और भारत में भी प्रसिद्द हो रहा है| अनुभवी इन्वेस्टर से लेके पान टपरी वाला भी इसकी चर्चा कर रहा है| टीवी, न्यूज़पेपर, इंटरनेट पर आये दिन इसके संबधित न्यूज़ आते रहते है|

बिटकॉइन का भविष्य – What is Bitcoin’s Future?

बिटकॉइन वैसे तो इस्तेमाल के लिए आसान है, यह एक ऑनलाइन वॉलेट जैसे काम करता है, पर यह बैकग्राउंड कैसे वर्क होता है, इसकी टेक्नोलॉजी, लॉजिक बहुत ही जटिल है| आम आदमी या एक टिपिकल एडुकेटेड इंसान को भी इसे समझने में मुश्किल आएगी, पर नामूनकिन भी नहीं है| यह टेक्नोलॉजी कंप्यूटर अल्गोरिथम पर चलती है, सही मायनो में कंप्यूटर एक्सपर्ट्स या क्रिप्टो करेंसी एक्सपर्ट ही इसे समज सकते है| बिटकॉइन में निवेश करनेमे यह एक बहोत बड़ी बाधा हो सकती है, जो इन्वेस्टमेंट हम समज नहीं सकते उसमे बिना सोचे समझे पैसे निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है|

चूँकि बिटकॉइन कोई भी भौतिक एसेट पर आधारित नहीं है, और इसकी स्कारसिटी आर्टिफीसियल है यह एक जोखिम भरा इन्वेस्टमेंट हो सकता है| यह एक कंप्यूटर अल्गोरिथम बेस्ड टेक्नोलॉजी है, पहले भी ऐसा हुआ है की अल्गोरिथम में बग या लूपहोल का लोगों ने गलत इस्तेमाल किया है| और वह तुरंत फिक्स भी की गए थे| यह कोई केंद्रीय बैंक को मध्यस्ती नहीं लेता, यह सीधा पीर-टू-पीर ट्रांज़ैक्शन करता है| तो हमे फ्रॉड प्रोटेक्शन, टैक्स एक्सेम्पशन जैसे बहुत सारी सुविधाएं नहीं मिलती, आगे जागे शायद इसमें सुधार हो पर अब तक तो भारत में बिटकॉइन अधिकृत नहीं है|

बिटकॉइन एक बहुत ही अस्थिर निवेश हो सकता है| साल २०१७ के शुरवात में इसकी प्राइस थी १००० अमरीकी डॉलर के आस पास, तो सितम्बर में यह ३७०० USD के आस पास पहुंची और फिर अब तक ही हाइएस्ट १७,५४९ USD दिसंबर में पहुँचा| और २ महिनोमे लुढककर आधे कीमत पर ८००० USD के निचे आया|

बिटकॉइन की अस्थिरता देख कर भी लोग इसमें निवेश कर रहें है, बड़े बिज़नेस मेन, इन्वेस्टर,सेलिब्रिटीज और आम आदमी भी इन्वेस्ट करा रह है| भारत में इसने इस कदर जोर पकड़ लिए है की आज कल छोटे छोटे शहरों में भी बिटकॉइन की डिमांड बढ़ी है| लोग निवेश कर रहें है इसका मतलब यह नहीं है की उनको यह नया पैसा, डिजिटल पैसा, क्रिप्टो करेंसी समझ आ रहीं है| अगले कुछ सेक्शंस में हम कोशिश करेंगे की आपको इसकी टेक्नोलॉजी, पद्धति और माइनिंग जैसे महत्वपूर्ण कांसेप्ट बताएं, यह बहुत ही टेक्निकल जानकारी है, हम इसे जादासे ज्यादा आसान हिंदी में लिखने की कोशिश करेंगे…

२००८-२००९ में हमने जागतिक आर्थिक मंदी देखी, यह कुछ बैंक्स और फाइनेंसियल एंटिटीज के वजह से हुआ| हालही में ग्रीस में हुई मंदी के कारण ग्रीसवासी अपना खुदका पैसा बैंक से निकाल नहीं पा रहें थे| इस कारण आम आदमी का बैंक और सरकार पर पहले जैसे भरोसा नहीं रहा| साल २००८-२००९ जैसे हालात भविष्य में भी आ सकते है, इसी कारण आम आदमी नए करेंसी ऑप्शन का स्वागत कर सकता है| जिनके पास अतिरिक्त पैसा है, वह अपने पोर्टफोलियो के डायवर्सिफाय करनेके लिए बिटकॉइन, एथेरेयम जैसे नए ऑप्शन का विचार कर रहे है|

बिटकॉइन कैसे काम करता है?

वैसे तो बिटकॉइन का इस्तेमाल करनेके लिए इसके पीछे की जटिल टेक्नोलॉजी समझने की जरूरत नहीं है| हम भारतीयों को अब डिजिटल वॉलेट्स यूज़ करना आता है, बिटकॉइन वॉलेट ऊपर ऊपर से वैसे ही होता है| आप बिटकॉइन वॉलेट कंप्यूटर या मोबाइल फ़ोन पे इंस्टॉल कर सकते है| यह वॉलेट आपका बिटकॉइन एड्रेस बनता है, जो की एक प्राइवेट की होती है| यह प्राइवेट की एक ईमेल एड्रेस जैसे काम करती है मगर यह एक एन्क्रिप्टेड की होती है| इस एड्रेस से आप बिटकॉइन भेज (send) या प्राप्त (receive) कर सकते है|

बिटकॉइन ट्रांज़ैक्शन समझने के लिए ब्लॉकचैन, माइनिंग जैसी तकनीक समझनी पड़ेगी| हम इसके बारेमे लेख के आखिर में लिखेंगे, अभी के लिए सीधी जानकारी पर ध्यान देते है| अभी हम सम्बंधित कुछ प्रश्न देखेंगे|

बिटकॉइन के फायदे क्या है?

वैसे तो पेपैल (paypal), पेटीएम (PayTM) जैसे ऑनलाइन मनी ऑप्शंस अभी मार्केट में है, फिर भी लोग निचे दिए हुए कारणोंसे बिटकॉइन पसंद करते है|

बिटकॉइन से ट्रांज़ैक्शन करना बहुत ही आसान है, आपको कार्ड स्वाइप करनेकी जरूरत नहीं है या OTP की जरूरत नहीं होती| इससे आप आसानी से इंटरनेशनल पेमेंट भी कर सकते है, इसके लिए बैंक के द्वारा होने वाली देरी नहीं होती, और ज्यादा प्रोसेसिंग फी भी नहीं देनी होती| बिटकॉइन कोई भी बैंक से संचालित नहीं होता, इसके यूजर्स ही इसको सहीं मायनो में संचालित करते है| तो आपका पैसा सरकार या बैंक के नियंत्रण में नहीं रहता| इसकी सबसे बढ़ी उपलब्धि है की इसकी सिक्योरिटी, यह मिलिट्रीग्रेड एन्क्रिप्शन इस्तेमाल करता है, जैसी हैक करना ना के बराबर होता है|

बिटकॉइन के जोखिम और नुकसान

जैसे पहले कहाँ गया है, यह सरकार या बैंक के नियंत्रण में नहीं रहता, तो कुछ गड़बड़ होने कर सरकार या बैंक हमे इसमें कुछ भी मदत नहीं कर सकती| जैसे के अगर आप पासवर्ड (प्राइवेट की) खो देते है, तो आपका पैसा गया| अगर आप गलती से किसी और को बिटकॉइन भेज देते है, तो आप उसको रिकवर नहीं कर सकते| बैंक में यह सुविधा होती है|

एक चीज़ लोग समझ नहीं पातें की, बिटकॉइन नार्मल ट्रांसक्शन के लिए इस्तेमाल करना अलग बात है और इसमें निवेश करना अलग बात होती है| भारत में ज्यादातर लोग इसको एक बढ़िया निवेश के अवसर के रूप में देखते है, एक हॉट इन्वेस्टमेंट ऑप्शन| कृपया जानिये की बिटकॉइन में पैसा कमानेके लिए निवेश करना और दैनिक इस्तेमाल एकहि ऍप से होता है पर यह दोनों चीज़ें पूरी तरह से अलग है|

बिटकॉइन एक बहुत ही वोलाटाइल, अस्थिर मुद्रा है, किसीको पता नहीं १ घंटे में इसकी प्राइस क्या होगी| नार्मल शेयर्स और स्टॉक मार्केट में ऐतिहासिक ट्रेंड और उसका डाटा होता है, जिससे हम निवेश में एडुकेटेड रिस्क ले सकतें है| हम स्टॉक मार्केट में सेकंड में स्टॉक खरीद या बेच सकतें है, बिटकॉइन में ऐसा नहीं होता| इसकी जटिल एन्क्रिप्शन और सेक्यूरोटी प्रक्रिया जो इसकी मूल खासियत है इसको बहुत धीमा बना देती है| एक बिटकॉइन ट्रांसक्शन के लिए घंटो लग सकते है| इतना वक्त लगनेका कारण है की ट्रांज़ैक्शन की वेरिफिकेशन कमसे कम ६ नोड्स से होनी होती है, और यह बिटकॉइन माइनर्स पर आधारित होता है|

जिसका ट्रांज़ैक्शन जितने बड़े मूल्य का होगा उसको उतनी प्रायोरिटी मिलेगी, उनका लेन-देन पहले होगा| या फिर प्रायोरिटी के लिए आपको ज्यादा प्रोसेसिंग फी देनी होंगी| यह सब व्यवहार अलग अलग एक्सचैंजेस द्वारा होता है, वह भी अपनी प्रोसेसिंग फी लेते है| यह एक्सचैंजेस प्राइवेट कम्पनीज होती है|

आये दिन ट्रांज़ैक्शन फीस और टाइम बढ़त जा रहां है| किसी भी और मार्केट की तरह अगर बिटकॉइन क्रैश होता है तो ऐसे मौके पर इसे बेचना और लॉस कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है| ऐसा कहाँ जाता है की बिटकॉइन का ४०% कुछ १००० लोगों के हातों में है, ऐसे लोग मार्केट में बड़ी हलचल पैदा कर सकतें है, जिससे शायद भारी नुकसान या फायदा भी हो सकता है|

बिटकॉइन का आजका रेट, प्राइस (कीमत) कैसे चेक करें?

सबसे पहले बहुत ही सिंपल सा तरीका हम बताएँगे जिससे आपन बिटकॉइन का आजका (current) रेट या कीमत देख सकते हो| आप गूगल पर “1 BTC to INR” सच कीजिये यह आपको रेट और कीमत दिखाएगा| आप वहींसे अलग अलग करेंसी जैसे USD, GBP में भी रेट देख सकते है| वहां बाजुमें आपको हिस्टोरिकल प्राइस चार्ट भी मिलेगा| यह ध्यान में रखियेगा की यह प्राइस रियल टाइम हो भी सकती है या नहीं भी|

आजके रेट और कीमत की ज्यादा डिटेल्ड जानकारी प्रसिद्ध क्रिप्टोकरेंसी एक्सचैंजेस की वेबसाइट पर चेक कर सकते है| जैसे की coindesk.com/price पर आप बिटकॉइन की डिटेल्ड जानकारी देख सकते है| वहां दी गए चार्ट में आप १ घंटे से लेकर पूरे समय का चार्ट देख सकते है| आप वहाँपे आजका ओपन, आजका हाई, आजका लौ, और चेंज भी देख सकतें है| वहां पे आप इथेरिअम(ethereum), बिटकॉइन कॅश (Bitcoin Cash), लाइट कॉइन (Lite Coin) का भी रेट देख सकतें है|

क्या आपको पता है बिटकॉइन और इथेरिअम कैसे एक जैसे और कैसे अलग अलग है? हम जल्द ही इसपे दूसरा लेख लिखेंगे, जल्द ही उसकी लिंक यहाँ पे देंगे|

जिओ कॉइन क्या है?

भारतीय मीडिया में न्यूज़ चल रहीं है, की रिलायंस जिओ अपनी खुदकी क्रिप्टोकरेंसी लॉन्च कर रह है, जिसका नाम होगा “जिओ कॉइन (Jio Coin)”. अभी तक रिलायंस के तरफ से पुख्ता जानकारी नहीं आई है| पर मार्केट में पहले से स्कैम वेबसाइट और ऍप्स आना चालू हुआ है| कृपया इन स्कैम से बचिए| हम जल्द ही आपको जिओ कॉइन में बारेमे जानकारी देंगे, आपको उसकी लिंक यहाँ मिल जायेगी|

बिटकॉइन की कीमत कैसे निर्धारित होती है -What Determines Bitcoin Price?

जैसे की पहले कहाँ गया है, बिटकॉइन किसी भी फिजिकल एसेट पर निर्धारित नहीं है| इसकी स्कार्सिटी (दुर्लाब्धता) आर्टिफीसियल मतलब कृत्रिम है| बिटकॉइन की प्राइस इसके सप्लाई और डिमांड पर निर्भर होती है| डिमांड बढ़ेगी तो प्राइस बढ़ेगी, डिमांड कम होगी तो प्राइस भी कम होगी| इसे आप कोई भी फिजिकल असेट में कन्वर्ट नहीं कर सकते, जैसे के नॉर्मल शेयर मार्केट में बॉन्ड्स या कमोडिटी को कर सकतें हो|

क्या बिटकॉइन फ़ैल हो सकता है? Can Bitcoin Fail?

कोई भी करेंसी फ़ैल या लुप्त हो सकती है, आज हम सोने और चांदी के सिक्के इस्तेमाल नहीं करते| जब पेपर मनी, प्लास्टिक मनी आया तभी ऐसे प्रश्न उठे थे | पर इसमें एक बहुत बड़ा फरक है यह सरकार या बैंक्स से संचालित नहीं होता| बिटकॉइन का अस्तित्व उसके यूजर्स और डिमांड पर निर्धारित है| तो, किसी और करेंसी की तरह बिटकॉइन भी फ़ैल सो सकता है|

बिटकॉइन का भविष्य इसके इस्तेमाल कर निर्भर है, जितने ज्यादा लोग इसको इस्तेमाल खाएंगे उतना यह चलेगा| अभीभी बहुत सारे बिज़नेस बिटकॉइन स्वीकार नहीं करते, तो इसका रोज मर्रा की ज़िन्दगी में उतना उपयोग नहीं हो पाता| अगर दुनिया में बहुत सारे देश इसे बैन करते है तो बिटकॉइन फ़ैल हो सकता है|

ब्लॉकचैन क्या है? What is Blockchain?

बिटकॉइन या कोई भी दूसरी क्रिप्टो करेंसी इस्तेमाल करनेके लिए आपको ब्लॉकचैन क्या है जानना जरूरी नहीं है| जैसे ईमेल का उपयोग करनेसे पहले इंटरनेट कैसे चलता है समझने की जरूरत नहीं होती| ब्लॉकचैन का टॉपिक टेक्निकल लैंग्वेज में समझना थोड़ा आसान होगा, पर आम आदमी या नॉन टेक्निकल लोग शायद इसे न समझ पाए| तो हम कोशिश करेंगे की हम आसान से आसान भाषा में आपको समझाये|

सबसे पहले, ब्लॉकचैन एक टेक्नोलॉजी है जिसका इन्वेंशन सातोशी नाकामोतो ने किया बिटकॉइन के लिए| पर ब्लॉकचैन अब दूसरे कामोंके लिए भी उपयोग में आ रहा है| ब्लॉकचैन की सिक्योरिटी और एन्क्रिप्शन के वजह से यह ऐसे कामोके लिए इस्तेमाल कर सकते है जिसमे सिक्योरिटी बहुत महत्वपूर्ण है जैसे मतदान, ट्रांज़ैक्शन प्रोसेसिंग, स्मार्ट डाक्यूमेंट्स आदि.

ब्लॉकचैन एक निरंतर बढ़नेवाली लिस्ट ऑफ़ रिकार्ड्स है, जिसे ब्लॉक्स कहते है| यह ब्लॉक्स क्रिप्टोग्राफ़ी के द्वारा जोड़े और सुरक्षित किये जाते है| हर ब्लॉक में पिछले ब्लॉक का क्रिप्टोग्राफ़ीक हैश, टाइमस्टाम्प और ट्रांसक्शनल डाटा होता है| एक ब्लॉक बहुत सारे ट्रांसक्शन्स का डेटा हो सकता है| एक बार ब्लॉक बनने बाद उसे बदला नहीं जा सकता| इस कारण यह खुले लेजर (Ledger) जैसे काम करता है तो किसी एक जगह पे स्टोर्ड नहीं होता, मतलब इसे डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर कहा जाता है| ब्लॉकचैन की बदौलत बैंकिंग की डबल स्पेंडिंग की समस्या का समाधान हो सकता है| इससे अंतरराष्ट्रीय लेन-देन बहुत काम समय में हो सकती है|

वर्तमान सरकार और बैंक्स बिटकॉइन या दूसरे क्रिप्टोकरेंसी के शायद खिलाफ हो सकती है, मगर वे चैनब्लॉक के समर्थन में है| यह टेक्नोलॉजी चालू बैंक प्रणाली कभी बहुत सुविधाएं उपलब्ध कर सकती है| इस टेक्नोलॉजी का उपयोग बहुत सारी चीज़ों के लिए किया जा सकता है जैसे स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स, क्राउड फंडिंग, फाइल स्टोरेज, सप्लाई चैन ऑडिट आदि. ज्यादा जानकारी के लिए यह आर्टिकल पढ़े – https://blockgeeks.com/guides/what-is-blockchain-technology/

बिटकॉइन माइनिंग क्या है? What is Bitcoin Mining?

ब्लॉकचैन के ही तरह बिटकॉइन के इस्तेमाल के लिए आपको माइनिंग क्या होती है जाननेकी जरूरत नहीं है, यह भी एक तकनिकी विषय है, जो मैं ज्यादा से ज्यादा आसान बनानेकी कोशिश करूंगा…

बिटकॉइंस कहाँ से आतें है? इसे कोण बनता है? हमें पता है पेपर मनी कैसे बनती है, सरकार करेंसी नोट्स छापते है, उसपे उनका पूरा नियंत्रण रहता है| बिटकॉइन इससे पूरी तरह विपरीत है, इसे सेंट्रल बॉडी नियंत्रित नहीं कराती, न इसे बनाती है| यह एक डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम है मतलब इसके यूजर जो एक जगह पे नहीं होते उनके पास कलेक्टिव अथॉरिटी रहती है|

बिटकॉइन माइनर्स एक सॉफ्टवेयर के द्वारा बहुत जटिल मैथ प्रॉब्लम सॉल्व करते हैं, और इसके बदले उन्हें कुछ बिटकॉइंस रिवॉर्ड के रूप में मिलते है| इसी कारण बहुत सारे लोग माइनिंग में जुड़ रहें है, वह इस सिस्टम का महत्व पूर्ण हिस्सा है| इससे नए बिटकॉइन बनाना किसी एक के हात में नहीं होता, और इसकी यही खासियत है| यहीं माइनर्स ट्रांज़ैक्शन वेरीफाई करनेमे भी भाग लेते है, मतलब जितने ज्यादा माइनर्स होंगे सिस्टम उतना सेफ होगा|

बिटकॉइन सिस्टम इन मैथ प्रॉब्लम को ऑटोमेटिकली जटिल बनता रहता है, इसे तकनिकी शब्दोमे प्रूफ-ऑफ़-वर्क (proof of work) कहा जाता है| ट्रेडिशनल सिस्टम में मेन सर्वर पर वेरिफिकेशन आदि काम होतें है, और वह इतने रिसोर्स इंटेंसिव नहीं होते| यह सिस्टम डिस्ट्रब्यूटेड माइनर्स के रिसोर्सेज मतलब कंप्यूटिंग पावर, टाइम और हार्डवेयर का इस्तेमाल करते है| ज्यादा जानकारी के लिए यह लेख पढ़े – https://www.bitcoinmining.com/

सूचना: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए (for informational purpose) लिखा गया है| हम बिटकॉइन से किसी भी तरह से सम्बंधित नहीं है| If you like our efforts to simplfy the such technical subject then you can appreciate our work by rating the article. You can also share your opinion and views in the comment box below. Please do not take this article as investment advice, tips or suggestions, this is for informational pupose only.

Read More At:
https://bitcoin.org/en/
https://en.wikipedia.org/wiki/Bitcoin

About the author

Ajay Chavan

"Cut from a different cloth"
I believe words have the power to change the world. So, here I am, determined to change the world and leave my mark on it, one word at a time.
A writer, amateur poet, ardent dog lover, Sanskrit & Urdu enthusiast, and a seeker of Hiraeth.

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