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स्वच्छ जल स्वच्छ भारत हिंदी निबंध | Swachh Jal Swachh Bharat

स्वच्छ जल स्वच्छ भारत हिंदी निबंध

जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्रालय, केन्द्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) वर्ष २०१७-१८ के लिए जल-संबंधित मुद्दों पर तीसरी राष्ट्रीय स्तर की निबंध प्रतियोगिता आयोजित कर रहा है। इस निबंध प्रतिस्पर्धा का उद्देश्य जल संरक्षण और जल प्रदूषण की रोकथाम के बारे में भारतीय युवाओं के बीच जागरुकता फैलाना है।

निबंध प्रतियोगिता का विषय “स्वच्छ जल – स्वच्छ भारत” है| यहां हम आपको एक सैंपल निबंध दे रहे हैं।हम आपको सुझाव देना चाहूंगा की आप इस निबंध की नक़ल न करें, नहीं तो इस निबंध स्पर्धा मूल लक्ष्य ही ख़तम हो जायेगा| बजाय, इस एस्से को आप पढ़ें, एक संपूर्ण विचार लें और अपना खुद का निबंध या भाषण संस्करण बनाएं। अपने खुद के विचार, समाधान उसमे जोड़ें|

स्वच्छ जल स्वच्छ भारत पर निबंध

जीवन पानी से शुरू हुआ, हमारा शरीर ६०% पानी का बना हुआ है, वयस्क मानव का मस्तिष्क और हृदय ७३% पानी के बने होतें है। हमारे पृथ्वी पर ७०% पानी है। मानव के अस्तित्व के लिए पानी बहुत महत्वपूर्ण है| हम जानते हैं की इसका कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है और हम ये भी जानते हैं कि यह सीमित मात्रा में उपलब्ध है लेकिन फिर भी हम इसे बर्बाद, खराब करते हैं, इसे दूषित करते हैं। ऐसा ही है कि हम अपने जीवन के स्रोतों को अपने हाथों से नष्ट कर रहे हैं।

जिस तरह से हम जल का अपव्यय कर रहें है इससे भविष्य में एक बड़ा जल संकट आने वाला है। कुछ जगह पर तो आज ही यह एक बड़ी समस्या बन गया है| गांव में महिलांए मीलों दूरसे पानी लेके आती है, शहरों में बोतल का पानी मंगाना पड़ता है| अगर हम अभी से इस पर काम करना चालू नहीं करते तो, हमारी तीसरी पीढ़ी जल के लिए एक दूसरे की जान लेने पे उतर आयेंगी| हम मनुष्योंने इस समस्या को बनाया है और हम इसे हल भी कर सकते हैं। हमें जल संरक्षण को बढ़ावा देने की आवश्यकता है और हमें पानी को प्रदूषित होने से रोकना चाहिए। हमें सामूहिक और व्यक्तिगत रूप से आदतों, नियमों और नीतियों को प्राप्त करने की ज़रूरत है जो भविष्य में आने वाली जल संकट को हल करने में मदद करेंगे| जल संरक्षण के लिए हम यह समाधान चुन सकते हैं

जल प्रदूषण

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की जो जल अभी हमारे पास उपलब्ध हे हमे उसकी कदर होनी चाहिए। हमारे पास बांध, झीलों, नदियों के रूप में जल उपलब्ध हैं लेकिन हम उसे औद्योगिक अपशिष्ट के साथ प्रदूषित करते हैं| जल को प्रदूषित करने वालों के लिए हमें सख्त कार्यवाही और नवीनीकृत नीतियोंको अपनाना चाहिए।

भारत में, नदियाँ इतनी बुरी तरीखे से प्रदूषित है कि उनका पानी पीने और अन्य उपयोगों के लिए अच्छा नहीं है| इसमें जहरीले रसायन, खनिज शामिल होते हैं जो मानव और जानवरों की खपत के लिए इसे व्यर्थ बना देता है। एक बहोत बड़ी ग्रामीण आबादी नदियों पर निर्भर रहती है, हम उनके स्वास्थ्य को खतरे में डाल रहे हैं।

नीतियों, नियमों, कार्यों और दंड के साथ; हमें जल संरक्षण / संधारण के अलग-अलग प्रयासों का भी संशोधन करनेकी की जरूरत है| यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, हमें भी अपने कर्तव्यों का पालन करने की आवश्यकता है। हम समस्याओं के लिए प्रशासन को दोषी मानते हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि हम भी इसका हिस्सा हैं; यह समस्या हल करने के लिए दोनों को एक साथ काम करने की जरूरत है। हमें नदियों में प्लास्टिक, कचरा, फेंकना नहीं चाहिए, हमें कमसे कम, और पर्याप्त मात्रा में पानी उपयोग करना चाहिए। सोसाइटी और कालोनियों को वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) करना चाहिए। यदि सरकार और नागरिक एक साथ आते हैं तो हम इस समस्या को हल कर सकते हैं |

बारिश के पानी का संग्रहण – Rain Water Harvesting

भारत एक उष्णकटिबंधीय देश है जहां हमें मानसून में बारिश की अच्छी मात्रा मिलती है मगर उसमे से अधिकांश पानी समुद्र चला जाता है| वर्षा जल संचयन से भूजल का स्तर बढ़ाया जा सकता है| इस पद्धति में, हम बारिश के पानी को छतों से एक स्थान पर एकत्रित करते हैं और इसे जमीन में अवशोषित होने देते हैं। यदि यह सभी के द्वारा किया जाता है, तो कुछ वर्षों के भीतर भूजल स्तर में वृद्धि होगी और यह पानी कुओं और बोरवेलों के साथ पंप किया जा सकता है। हम इस पानी को जमा भी कर सकते हैं और विभिन्न प्रयोजनों के लिए उपयोग कर सकते हैं।

पान-लोट नामक एक अन्य तकनीक है जिसमें वर्षा जल प्रवाह अलग-अलग छोटे और बड़े संरचनाओं के साथ बाधित किया जाता है। यह जल प्रवाह को धीमा कर देता है जो आम तौर पर नदी तक चलता है और फिर समुद्र में खाली हो जाता है। यह तकनीक पानी को जमीन में अवशोषित होने के लिए अधिक समय प्रदान करता है जो भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। इससे उस क्षेत्र में घास और पौधों का विकास होता है, जो बदले में मृदा अपरदन कम करता है और पानी के बहाव में बाधा डालता है और यह पानी को जमीन में अवशोषित होने मे मदद मिलती है।

नदी कायाकल्प – River Rejuvenation

जैसा कि हमने पहले कहा था, भारत एक उष्णकटिबंधीय देश है और भारत के अधिकांश भाग में अच्छी बारिश होती है, इस कारण हमारे पास नदियोंका अच्छा जाल हैं। लेकिन यह नदियां पूरे साल बहती नहीं हैं, ३ से ४ महीनों के बाद इन नदियों का पानी पूरी तरह से सूख जाता है ।

हमें सूखी हुई नदियों को फिर से जीवीत करने की जरूरत है| ईशा फाउंडेशन के “सेव रिवर” जैसी सामाजिक पहल की सराहना होनी चाहिए और इसे कार्यान्वित भी करना चाहिए। यदि हम मौजूदा नदियों को फिर से जीवीत करते हैं तो आबादी का एक बड़ा समूह इससे प्रभावित होगा। गंगा नदी भारत की सबसे बड़ी और सबसे प्रतिष्ठित नदी है। इसकी देवी के रूप में पूजा भी की जाती है, लेकिन हमने इसे कल्पना से परे प्रदुषित किया है| दिल्ली से पश्चिम बंगाल तक के लाखों लोग इस नदी पर निर्भर हैं, अगर हम इसे स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त कर देते हैं, तो यह न केवल पानी देगा बल्कि लाखों लोगों के लिए रोजी रोटी का अवसर प्रदान करेगा। हमने देखा है कि इस कार्य के लिए भारत सरकार का एक अलग मंत्रालय है, यह एक अच्छी पहल है और इसे कार्यान्वित करने की आवश्यकता है।

रिवर लिंकिंग

भारतीय सरकार नदियों को जोड़ने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार कर रही है। जिसके तहत जादा पानी वाले क्षेत्र से नदी का अधिक पानी अन्य क्षेत्रों में ले जाया जाएगा । यह एक भूवैज्ञानिक रूप से जोखिम भरी योजना है, सरकार को सभी मुद्दोंपर विचार मंथन करना होगा। लेकिन यदि योजना सफल होती है तो इससे लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ होगा। ऐसा करते समय, सरकार को जल जीवन और आस-पास के पारिस्थितिकी के संरक्षण के समाधान भी खोजने चाहिए।

नदी सौंदर्यीकरण

हमें मौजूदा झीलों, बांधों, तालाबों, कुओं को साफ करने की जरूरत है ताकि इसे अधिक पानी बचाया जा सके। हमें साबरमती रिवरफ्रंट जैसे परियोजनाओंको बढ़ावा देने की जरूरत है, इससे जनता में जागरुकता बढ़ेगी और लोग जल संरक्षण के महत्व को स्वीकार करेंगे।

हमें और अधिक बांध (डैम) बनाने की जरूरत है, यह पानी का भंडारण बढ़ाता है और बिजली पैदा करने में भी मदद करता है, जो कि भारत में और एक बड़ी समस्या है। लेकिन बांधों के निर्माण के दौरान सरकार को सभी पर्यावरणीय, पारिस्थितिक प्रभावों पर विचार करना होगा। लोगों को बांधों का समर्थन करना चाहिए, हमें राजनीतिक खेल की खातिर सरकारी पहल का विरोध नहीं करना चाहिए।

जल वितरण और मरम्मत

हमारे पास एक अच्छा जल वितरण नेटवर्क नहीं है| जब पानी की पाइप टूट जाती है तो हम पानी का भारी नुकसान देखते हैं। समस्याओं को जल्द से जल्द ठीक करने के लिए हमारे पास पूर्वनिर्धारित, अच्छी तरह से विनियमित प्रक्रियाएं और उपकरण होने चाहिए|

निष्कर्ष

जल जीवन का आधार है, जल से ही जीवन शुरू हुआ है। हम खराब अर्थव्यवस्था, बुनियादी सुविधा और सोशल मीडिया की अनुपस्थिति में जीवित रह सकते हैं लेकिन हम बिना पानी के बचे नहीं रह सकते हैं। हमें समस्या के समाधान के लिए पानी के महत्व को स्वीकार करने और सरकार की पहल में हिस्सा लेने की जरूरत है। हमें व्यक्तिगत प्रयासों को बढ़ावा लेने की जरूरत है | यह जल संकट हमारे द्वारा ही बनाया गया है और हम इसे हल भी कर सकते हैं, लेकिन यह संभव तब होगा जब हम जागेंगे और जल संधारण की तरफ पहल करेंगे|

नोट: कृपया ध्यान दें कि यह निबंध १५०० शब्द का नहीं हैं। आप निबंध की लंबाई बढ़ाने के लिए प्रत्येक उप-विषय में अधिक पंक्तियां जोड़ सकते हैं। १५०० वर्ड्स की अधिकतम सीमा है, न्यूनतम नहीं|

निबंध प्रतियोगिता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी

  • निबंध विषय – स्वच्छ जल – स्वच्छ भारत
  • प्रतियोगिता १८ वर्ष तक आयु वर्ग के सभी लोगों के लिए खुली है।
  • सभी प्रतिभागियों के लिए आधार नंबर अनिवार्य है|
  • प्रत्येक भागीदार को केवल एक निबंध सबमिट करना है। निबंध 1500 शब्दों से अधिक नहीं होना चाहिए।
  • प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित की जाएगी।
  • निबंध प्रस्तुत करने की आखिरी तारीख – ३१/१२/२०१७
  • विस्तृत जानकारी के लिए कृपया देखें: CGWBB.gov.in

यह निबंध हिंदी में है, हम ने इसका इंग्लिश अनुवाद भी किया है, यह है लिंक Swachh Jal Swacch Bharat। हम वालंटियर्स को आमंत्रित करना चाहते हैं जो इस एस्से को मराठी, तमिल, तेलुगू, मलयालम, कन्नड़, पंजाबी, बंगाली, उर्दू, उड़िया आदि भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने मे मदद कर सकते हैं।

About the author

Sunil

He is an ardent reader and likes to share what he learns. He believes in reforming the Indian education system, at the same time he is willing to help students survive the existing one.

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