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स्टीफन हॉकिंग हिंदी निबंध, भाषण | Stephen Hawking in Hindi

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Business Insider

स्टीफन हॉकिंग एक बहोत ही बेहतरीन और महान वैज्ञानिक थे. उन्होंने अपने जीवनकाल में कई कठिनाइयोंका सामना करते हुए, वे दुनियाभरके करोडो युवाओंके और विद्यार्थियोंके प्रेरणास्थान बने. स्टीफन हॉकिंग के जीवन बारेमे लोगोंको और जानकारी देने के लिए हमने यह लेख लिखा है. यह लेख आपको स्टीफन हॉकिंग के जीवन पर हिंदी निबंध तथा भाषण लिखने में सहायता करेगा. तो चलिए शुरू करते है.

स्टीफन हॉकिंग हिंदी निबंध, भाषण, जानकारी | Stephen Hawking Hindi Essay

इंसानी जीवन को और सुखकर बनाने के लिए और इस ब्रम्हांड को अच्छी तरह से समझने के लिए कई शास्त्रज्ञ और वैज्ञानिकोने बहोत बड़ा योगदान दिया है. और ऐसेही कुछ महँ वैज्ञानिकोमेसे एक है स्टीफन हॉकिंग. स्टेफेन हॉकिंग एक महँ वैज्ञानिक थे. अपनी ज्यादातर जिंदगी व्हीलचेयर में बिताने के बावजूद भी उन्होंने विज्ञानं क्षेत्र में बहोत बड़ा योगदान दिया है और जिस ब्रम्हांड में हम रहते है उसके बारेमे कई साड़ी जानकारी उन्होंने उपलब्ध की है. लेकिन जैसी की हर अच्छी चीज का कभी न कभी अंत होता है उसी प्रकार प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग का हाल ही में १४ मार्च २०१८ को देहांत हुआ. उनके देहांत के बाद पूरी दुनिया शोक में डूबी हुई है.

स्टीफन हॉकिंग ने दुनियाभर के लोगो को विज्ञान क्षेत्र में अपना करिअर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया.स्कूल और महाविद्यालयोंके विद्यार्थी उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानते थे. इसीलिए इस आर्टिकल में हम ने स्टीफन हॉकिंग के बारे में सभी जानकारी हिंदी मि उपलब्ध की है जैसे की उनका बचपन, उनकी शिक्षा, उनका परिवार, पत्नी, विज्ञान क्षेत्र में उनका योगदान, उनकी खोज, पुस्तके, पुरस्कार तथा उनकी मृत्यु के बारे में सभी जानकारी इस लेख में दी गयी है. यह स्टीफन हॉकिंग के बारे में जानकारी आपको उनके जीवन पर निबंध, भाषण तथा परिच्छेद लिखने में सहायता करेगी.

बचपन, शुरुवाती ज़िन्दगी और परिवार

स्टीफन हॉकिंग का पूरा नाम स्टीफन विलियम हॉकिंग था. उनका जन्म ८ जनवरी, १९४२ के दिन लंदन के ऑक्सफ़ोर्ड शहर में हुआ था. उनके जनम दिन के बारे के एक दिलचस्प बात यह है की उसी दिन प्रसिद्ध वैज्ञानिक गैलिलिओ की मृत्यु को ३०० साल पुरे हुए थे. उनके माता-पिता को चार संताने थी औ स्टीफन उन सब में से बड़े थे. उनका परिवास एक उच्चा शिक्षित परिवार था. उनके पिता का नाम फ्रैंक हॉकिंग था और वह ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में एक चिकित्सा शोधकर्ता का काम करते थे उनकी माँ का नाम इसाबेल हॉकिंग था और १९३० में उन कुछ ही महिलाओमेसे एक थी जिन्होंने यूनिवर्सिटी में शिक्षा के लिए प्रवेश लिया था.

शिक्षा

जब स्टफन हॉकिंग ११ साल के थे तब उन्होंने सेंटअल्बांस नामक स्कूल, ज्योंकि हेर्टफोर्डशायर में एक स्थानिक पब्लिक स्कूल था उसमे दाखिला लिया. १७ साल की आयु में उन्होने ने ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया. उनके पिता यह चाहते थे की स्टीफन मेडिकल यानि की चिकित्सा क्षेत्र का अभ्यास करे लेकिन स्टीफन हॉकिंग को गणित विषय में रूचि थी. उस वक्त ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में गणित विषय के शिक्षा का इंतजाम नहीं था, इसी लिए स्टीफन हॉकिंग ने फिजिक्स यानि की भौतिक विज्ञान और कॉस्मोलॉजी तथा ब्रम्हांड विज्ञानं के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया.
अक्टूबर १९६२ में स्टीफन हॉकिंग ने केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ एप्लाइड मैथमेटिक्स एंड थ्योरेटिकल फिजिक्स विभाग में प्रवेश लिया. उन्होंने “पॉपर्टीज़ ऑफ़ एक्सपैंडिंग यूनिवर्स” विषय पर अपना पीएचडी ग्रंथ ततः थीसिस लिखी और १९६५ में रिसर्च फेलो और १९६९ में फेलो फॉर डिस्टिंक्शन इन साइंस बन गए.

खोज, अविष्कार और विज्ञान में योगदान

१९७० में रोजर पेनरोज के साथ स्टीफन हॉकिंग ने यह खोज की की आइनस्टाइन की थ्योरी के हिसाब से ब्रम्हांड और वक्त की शुरुवात एक बड़े विस्फोट जिसे बिग बैंग के नामसे पहचाना जाता है और उसका अंत ब्लैक होल से होता है. उन्होंने यह भी बताया की ब्रम्हांड की वक्त के हिसाब से कोई सीमा नहीं है. जिसका मतलब की इस ब्रम्हांड की उत्पत्ति विज्ञान के नियमो के अनुसार ही हुई थी.
१९७४ में उन्होंने यह भी खोज की की ब्लैक होल पूर्णतः शुन्य तथा खाली नहीं है जैसी की पहले माना जाता था. उनके अनुसार ब्लैक होल में छोटी मात्रा ऊर्जा उत्सर्जित होती रहती है और उस रेडिएशन को उन्होंने हॉकिंग रेडिएशन्स का नाम दे दिया.

व्यावसायिक जीवन, उपलब्धियां, डिग्रीज और पुरस्कार

१९६६ में स्टीफन हॉकिंग को उनके “सिंगुलेरिटी एंड थे ज्योमेट्री ऑफ़ स्पेस टाइम ” निबंध के लिए एडम्स पुरस्कार से नवाजा गया. स्टीफन हॉकिंग एक सिद्धांतिक भौतिक विज्ञानी और ब्रम्हांड विज्ञानी थे. उन्होंने ब्रम्हांड के उत्पत्ति के बारे में अभ्यास किया और ब्रम्हांड के नियमो को समझा. प्रोफेसर हॉकिंग को १३ उच्च होनोरोरी डिग्री मिली. उन्हें १९८२ में सीबीई से नवाजा गया. उसके बाद १९८९ में कम्पैनियन ऑफ़ ऑनर, २००९ में प्रेजिडेंट मैडल और फ्रीडम से नवाजा गया. प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग को कई मैडल और परस्कार भी मिले. २०१३ में उन्हें फंडामेंटल फिजिक्स प्राइज, २००६ में कोपली मैडल, और १९८८ में वुल्फ फाउंडेशन प्राइज भी मिला. स्टीफन हॉकिंग फेलो ऑफ़ रॉयल सोसाइटी और यूनाइटेड स्टेट्स नेशनल अकादमी ऑफ़ सेंसस एंड पोंटिफिकल अकादमी ऑफ़ साइंस के सदस्य भी थे.

स्टीफन हॉकिंग के द्वारा लिखी हुई पुस्तके, किताबे

अपनी आयुकाल में हॉकिंग ने कई किताबे तथा पुस्तके प्रकाशित की. उसमे कुछ पुस्तके निचे दी गयी है,

  • द लार्ज स्केल स्ट्रक्चर ऑफ़ स्पेस टाइम विथ जी. एफ. आर. एलिस (The Large Scale Structure of Spacetime with G. F. R. Ellis)
  • जनरल रिलेटिविटी: ऍन आइनस्टाइन सेंटेनरी सर्वे विथ डब्ल्यू इजराइल (General Relativity: An Einstein Centenary Survey with W. Israel)
  • ३०० इयर्स ऑफ़ ग्रेविटेशन विथ डब्ल्यू इजराइल (300 Years of Gravitation with W. Israel)
  • अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम (A Brief History of Time)
  • ब्लैक होल्स एंड बेबी यूनिवेर्सेस (Black Holes and Baby Universes)
  • द यूनिवर्स इन अ नटशेल (The Universe in a Nutshell)
  • द ग्रैंड डिज़ाइन एंड माय ब्रीफ हिस्ट्री (The Grand Design and My Brief History)

यह किताबे पुस्तके स्टीफन हॉकिंग द्वारा लिखी गयी थी.

स्टीफन हॉकिंग मूवी/ बायोपिक

स्टीफन हॉकिंग के जीवन पे आधारित कई फिल्मे बनायीं गई और वह इस प्रकार थी.

  • अ थ्योरी ऑफ़ एवरीथिंग (A Theory of Everything)
  • हॉकिंग (Hawking)
  • अ ब्रीफ हिस्रोती ऑफ़ टाइम ( A Brief History of Time)
  • बियॉन्ड द होराइज़न (Beyond the Horizon)
  • फेट ऑफ़ थे यूनिवर्स (Fate of the Universe)

इन मूवी और फिल्मोंके आलावा स्टीफन हॉकिंग कई टीवी कार्यक्रमोंमेभी दिखाई गए. स्टीफन हॉकिंग का जीवन परिचय तथा जीवनी उनकी कितबोसे समाजी जा सकती है इसके आलावा इंटरनेट पर स्टीफन हॉकिंग की कई जीवनिया उपलब्ध है.

२१ साल की आयु में स्टीफन हॉकिंग को ऐ इस एल नामक मोटर न्यूरॉन डिसिस व्याधि ने जखड़ लिया. इस व्याधि ने उन्हें पूरी तरह अपाहिज बना दिया हुए बोलने के लिए भी कंप्यूटर के आवाज की जरुरत पड़ने लगी. ५० से ज्यादा साल तक इस व्याधि से लड़के बाद आखिर १४ मार्च २०१८ को उनकी अपने केम्ब्रिज, इंग्लैंड में स्थित अपने घर में मृत्यु हो गयी. उनके पश्च्यात उनकी पत्नी, ३ बच्चे और ३ पोते पोतिया है.

स्टीफन हॉकिंग एक महँ वैज्ञानिक थे. अपने विकलांगता से लड़कर उन्होंने कई खोजे की और ,मानवता की मदत की. स्टीफन हॉकिंग आज भी हमारी यादो में जिन्दा है और हम उन्हें हमेशा याद करेंगे.

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About the author

Ajay Chavan

"Cut from a different cloth"
I believe words have the power to change the world. So, here I am, determined to change the world and leave my mark on it, one word at a time.
A writer, amateur poet, ardent dog lover, Sanskrit & Urdu enthusiast, and a seeker of Hiraeth.

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