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रक्षाबंधन हिंदी निबंध, भाषण – Raksha Bandhan Essay in Hindi

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Tata Cliq

हमारे देश में प्राचीन संस्कृति के प्रति बड़े सन्मान का भाव अभी भी व्याप्त है| भाई बहन के प्रेम के प्रतिक का ये त्यौहार है| हमारी प्राचीन संस्कृति की परंपराएँ और मान्यताएँ मनुष्य की उदार प्रवृत्ति की द्योतक है| इन परंपराओं के द्वारा हमें मनुष्य के आचरण की अच्छे पर विश्वास होता है| रक्षाबंधन का त्यौहार भी हमारी इसी उदात्त और उदार भावना की अभिव्यक्ति करता है| इसीलिए हमने यह रक्षाबंधन पर हिंदी निबंध, भाषण, लेख लिखा है.

रक्षाबंधन हिंदी निबंध, भाषण, जानकारी – Raksha Bandhan in Hindi

रक्षाबंधन का पवित्र त्यौहार रक्षा और संबंध की भावना से संयुक्त है| इस त्योहार में बहन और भाई के पवित्र स्नेह की उज्वल भावना निहित है| यद्यपि आज इस पर्व का महत्व भाई-बहन के संबंध को लेकर विशेष हो गया है| लेकिन प्राचीन काल में इसका रूप दूसरा था| भाई-बहन से इस पर्व का संबंध बाद में स्थापित हुआ|

रक्षाबंधन की परंपरा

रक्षाबंधन का त्योहार वर्षाकाल में श्रावण महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है| पुराने ज़माने में ऋषि लोग अपने आश्रमों में रहा करते थे| वर्षाऋतु में उनका घूमना-फिरना नहीं होता था| इन दिनों ये लोग अपने आश्रमों में रह कर ही उपदेश आदि दिया करते थे|श्रावण पूर्णिमा का दिन पूर्ण आहुति का दिन माना जाता है| इसके बाद ये ऋषि लोग अपने आश्रमों से बाहर जाकर पर्यटन आदि किया करते थे| वर्षा ऋतु में ऋषियों की रक्षा का भार राजा पर ही हुआ करता था| इनकी समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति भी शासन द्वारा होती थी|

लेकिन रक्षाबंधन की यह परंपरा धीरे-धीरे बदल गई| कुछ समय के बाद ये ऋषि-ब्राम्हण राजाओं के आश्रित हो गए| अब वे राजाओं के हाथ में पवित्र धागा बांधते – जिसे रक्षा या राखी कहा जाता और बदले में राजा हमेशा उनकी रक्षा करते थे| मध्य युग में इसमें और परिवर्तन हुआ| अब महिलाएँ भी रक्षा प्राप्त करने की अधिकारिणी मानी गई|  (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान निबंध, भाषण)

अपनी रक्षा के लिए कन्याएँ अपने भाइयों के हाथ में रक्षा(राखी) बांधने लगी और भाई पर उनकी रक्षा का नैतिक भार आ गया| चित्तोड़ की रानी कर्मवती का उदाहरण इस संबंध में सर्व विख्यात है| उसने अपनी रक्षा के लिए हुमायू को राखी भेजी थी और हुमायू ने भाई के कर्तव्य को बड़ी ईमानदारी के साथ निभाया था|

रक्षाबंधन की भावना

आज भी रक्षाबंधन की इस उदात्त और पवित्र भावना में बहुत विकार आ गया है| बहने महीने पूर्व से इस पर्व की प्रतीक्षा करती है| इस अवसर पर विवाहित बहने अपने मायके जाती है| बहन अपने भाई के लिए बहुत ही अच्छी राखी खरीदती है| आज-कल सोने या चाँदी की भी राखी बाजार में मिलती है| इस पर्व में सभी बाजार राखियों से सजे होते है|

बहन अपने भाई के लिए पूजा की एक थाली सजाती है| जिसमे दिया, कुमकुम, चावल, मिठाई होती है| बहन बड़े प्यार से अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई प्यार के रूप में उसे पैसे, कपडे या कोई गिफ्ट देता है| रक्षाबंधन मराठी माहिती, निबंध, भाषण, लेख 

रक्षाबंधन का महत्त्व

रक्षाबंधन का एक दूसरा महत्त्व भी है| सामान्यतः यह विश्वास किया जाता है कि श्रावण कि पूर्णिमा के बाद से वर्षाकाल का तूफानी समुद्र शांत होने लगता है और यह धीरे धीरे इस योग्य होने लगता है कि इस पर व्यापार के सिलसिले में आवागमन आरंभ किया जा सकता है|

वर्षाकाल में तूफान के भय से समुद्र यात्रा बंद हो जाती है| रक्षाबंधन के दिन से ही इस समुद्र यात्रा का श्री गणेशा होता है| इसीलिए इस दिन व्यापारी, कोली लोग समुद्र की पूजा करते है| नारियल आदि चढ़ा कर उसका अभिषेक करते है|

इसीलिए रक्षाबंधन को नारियल पूर्णिमा भी कहा जाता है| यह भी विश्वास प्रचलित है की इसी दिन विष्णु ने वामन बनकर राजा बलि के गर्व को नष्ट किया था| कुछ भी हो, यह त्योहार कर्तव्य का भान कराने वाला पवित्र पर्व है| इस दिन व्यापारियों को अपने व्यावसायिक कर्तव्य का भान होता है और वे नए उत्साह से अपने नए वर्ष के व्यापार के लिए तयारी करते है|

भाई के मन में अपनी बहन के प्रति कर्तव्य का भाव जगाता है| इस पर्व से जीवन का लक्ष्य सामने आता है और जीवन के उत्तरदायित्व के प्रति प्रेरणा प्राप्त होती है|

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About the author

Ajay Chavan

"Cut from a different cloth"
I believe words have the power to change the world. So, here I am, determined to change the world and leave my mark on it, one word at a time.
A writer, amateur poet, ardent dog lover, Sanskrit & Urdu enthusiast, and a seeker of Hiraeth.

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