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नोटबंदी के फायदे, नुकसान, प्रभाव और परिणाम पर हिंदी निबंध, भाषण

नोटबंदी के फायदे, नुकसान, प्रभाव और परिणाम

हम सब जानते है की ८ नवम्बर की शाम ८ बजे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था| इसके तहत ५०० और १००० रूपए के नोटोको गैरकानूनी घोषित किया था| अब इनकी कीमत एक पेपर मात्रा रह गयी थी| सरकार ने जनता को ५० दिन की महोलट दी थी जिसमे हमें ५०० और १००० के नोट बैंक में जमा करवाने थे, और उसके बदले बैंक से नोट बदलवाने थे| इस अचानक की गयी घोषणा से पूरा भारत प्रभावित हुआ था| हमें घंटो तक एटीएम, बैंक के सामने कतार में समय बिताना पड़ा| इस दौरान कई लोगोंकी जान भी गयी तो कई लाइन में थककर गिर पड़े|

नोटबंदी का प्रभाव और परिणाम (लाभ-हानि)

नोटबंदी का भारतीय नागरिक और व्यवसायों पर बहोत बड़ा प्रभाव हुआ| सब के लिए यह कठनाई का समय था| रियल एस्टेट के भाव बहोत गिर गए, यह उद्योग पहलेसेही खस्ता हालत में था, नोटबंदी के वजह से तो इसकी नीव पर ही प्रहार हुआ| कीमतों में गिरावट, मजदूरोंको वेतन देने के लिए नकद की किल्लत ने रियल एस्टेट बाज़ार हो ख़ासा परेशान किया था| जिनके पास पैसा था ऐसे जागरूक ग्राहकोंने  इस परिस्थिति का लाभ उठाया और कम कीमत में घर, जमीन खरीद ली| काला धन रखने वालोंने भी जमीने और घर खरीद लिए, पर इस कारण वह अब सरकार के राडार में आ गए है| अब एक साल के बाद यह मार्केट फिर से तेजी पकड़ रहा है|

नोटबंदी के कारण रोज मर्रा की ज़िन्दगी की बड़ी प्रभावित हुई, हम किराना, सब्जी, दूध नहीं ले पा रहें थे| टैक्सी, बस के लिए छुट्टे पैसे नहीं थे, रोजाना ऑफिस जानेवालोंको इससे बहोत तख़लीफ़ हुई| पैसोंके कमी के कारण दवाइया नहीं मिल रहीं थी, अस्पताल मरीजोंको एडमिट नहीं कर रहें थे; इस कारण बहोत सारे लोगों की जान भी चली गयी| नोटबंदी के काल में यह सबसे शोकाकुल घटना थी| कहीं लोगों को अपनी शादी पोस्टपोन करनी पड़ी| दिहाड़ी मजदूर जो दिन के कमाई पे पेट पालते है, उन्हें, उनके बच्चों को भूका रहना पड़ा| लाखो लोगोंको नोटबंदी के वजह से काफी तख़लीफ़ोंसे गुजरना पड़ा फिर भी उन्होंने इस राष्ट्रिय आंदोलन का समर्थन किया| अब एक साल के हो गया है, हालात अब ठीक हुए है, पर फिर भी जनता में नोटबंदी के बारेमे आक्रोश नहीं है| इससे यह प्रतीत होता है की आम जनता को सरकार की यह पहल सराहनीय लगी| इस योजना के कार्यान्वयन पर बहोत लोग नाराज़ जरूर हुए पर भी उन्होंने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का साथ दिया|

नोटबंदी के चलते सोने के मार्केट में भारी गिरावट आयी, इससे शेयर मार्केट को भी हानी हुई| वैसेही रोज मर्रा की चीज़ों से लेकर गाड़ियों के खरीद में भारी गिरावट आ गई थी, एक तरह से कुछ हफ़्तों के लिए बाज़ार ठप हो गया था| नोटबंदी से भारत का हर बाज़ार और नागरिक प्रभावित हुआ था|

नोटबंदी के नुकसान / हानी

इस योजना का मकसद सही था मगर कार्यान्यवन (इम्प्लीमेंटेशन) सही नहीं हुआ, इसके वजह से करोडो लोगों को तख़लीफ़े झेलनी पड़ी| नोटबंदी के अचानक की गयी घोषणा से किसको तैयारी करनेका समय ही नहीं मिला| एटीएम में नए नोटोंके माप से मशीन को कैलिब्रेट करनेमे बैंक कर्मचारियोंको बहोत समय लगा| सरकार नए नोट तेज़ी से छाप नहीं पाई, इस कारण आम जनता और बिजनेस की बहोत हानी हुई|

जिस मूल उद्देश्य से नोटबंदी जारी की थी उसमे सरकार सफल नहीं रही| भ्रष्टाचार ख़तम नहीं हुआ, ना आतकवादी फंडिंग| ८ नवम्बर से कुछ महीनों में ही नकली नोट फिरसे बाज़ार में आये थे| इस कारण सरकार मूल योजना से हटकर कैशलेस इकॉनमी का बहाना आगे किया| इससे जो परिणाम सरकार को अपेक्षित थे वह वे हासिल नहीं कर पायें|

विरोधी दल तो नोटबंदी को भारत का सबसे बड़ा स्कॅम बताने लगे| अलग-अलग राजनैतिक गाठोंने साथ आकर पीएम मोदी के खिलाफ प्रदर्शन किये, मोर्चा निकला| पर जनता ने उन्हें उतना साथ नहीं दिया| भारत की आम जनता अब होशियार हो गयी है, क्या सही है क्या गलत है उसका खुद फैसला ले रही है|

नोटबंदी के फायदे / लाभ

हर चीज़ के दो पहलू होतें है, एक सही एक गलत, एक अच्छा एक बूरा| नोटबंदी का भी ऐसा ही हुआ है| नोटबंदी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी की परेशानियोंका सामना करके भी आम लोगों ने पीएम मोदी का और सरकार का साथ दिया| इसकी अचानक की गयी घोषणा से तख़लीफ़ हुई मगर अगर यह पहले ही बताया जाता तो यह योजना बिनकूल ही असफल हो जाती| काला धन वाले चोरों ने अपने काले धन का कुछ ना कुछ इंतज़ाम किया होता| इसकी गोपनीयता ही इसका मूल वैशिष्ठ था| सरकार को इसे बैंक से यहाँ तक की अपने मंत्रीयोंसे भी छुपाना पड़ा|

जैसा हमें वादा किया गया था की भ्रष्टाचार,आतंकवाद ख़तम होगा वैसा हुआ नहीं पर इसपे नियंत्रण जरूर आया है| भ्रष्टाचार करने वाले, टैक्स चोर, काला धन रखने वाले अब डरने लगे है, यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है| नोटबंदी के कारण हज़ारो भ्रष्टाचारी लोग सरकार की रडार में आएं है, वे उनपे नजर रखे हुए है|

डिजिटल ट्रांज़ैक्शन मूल मुद्दा नहीं था, मगर यह बहोत ही सफल हुआ| नकद के कमी के चलते लोग ऑनलाइन ट्रांसफर, वॉलेट पेमेंट, क्रेडिट डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करने लगे| इस कारण भारत में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांज़ैक्शन काफी बड़ा, यह अर्थव्यवस्था के लिए बहोत अच्छी बात है|

नोटबंदी एक बहोत ही बड़ा और पेचीदा निर्णय था, भारत जैसे बड़े और विविधता से भरे देश में ऐसा कुछ करनेकी सोचना ही हजम नहीं होता पर पीएम मोदी ने यह कदम उठाया| इससे सरकार की बड़े निर्णय लेनी की क्षमता का पता चलता है| आगे जा के हमे यहीं निर्णय क्षमता सर्जिकल अटैक, चीन बॉर्डर डिस्प्यूट और जीएसटी में दिखी| भारत एक बहुत बड़ा और जटिल देश है, हमे अगर आगे बढ़ाना है तो बड़े निर्णय लेने होंगे| हम कब तक वोट राजनीती खेलते रहेंगे| अगर भारत आज आगे नहीं बड़ा तो शायद कभी नहीं बढ़ पायेगा|

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About the author

Sunil

He is an ardent reader and likes to share what he learns. He believes in reforming the Indian education system, at the same time he is willing to help students survive the existing one.

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