निबंध भाषण

मैंने गर्मी की छुट्टी कैसे बिताई, गर्मी की छुट्टियां पर निबंध हिंदी में

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गर्मी या सर्दी की छुट्टियों में बहुत सारी चीज़े करने जैसी होतीं है, जैसे फॅमिली या दोस्तोंके साथ घूमने जाना, कोई समर कैंप अटेंड करना आदि| पर जरूरी नहीं की सब लोग ऐसे ही करें, हर एक के हालत या पसंद अलग होती है| कोई शायद गर्मी की छुट्टी में कोई जॉब करना चाहे या कोई बस घर बैठ के फॅमिली के साथ वक्त बिताना चाहे| आपने जैसे अपनी गर्मी की छुट्टियाँ बितायी उस हिसाब से आप यह निबंध या भाषण लिख सकतें है| यहाँ इस लेख में हम आपको गर्मी की छुट्टियोंमे की हुई यात्रा और अपने अनुभव का उदहारण देंगे| हम कोशिश करेंगे की हम इस विषय पर और अलग तरीके के निबंध भी आपके लिए लिखें|

गर्मी की छुट्टियां, मैंने गर्मी की छुट्टी कैसे बिताई हिंदी निबंध

मैं मुंबई (आपका शहर) में रहता हूँ, और यहां अप्रेल और मई के महिनोमे बहुत ज्यादा गर्मी होती है| यह दो-तीन महीने किसीको पसंद नहीं होतें है| मैंने पिछले साल बहुत पढाई की है, और मुझे इन छुट्टियों में कुछ अलग भी करना था| इसीलिए मैंने तय किया की में इस साल गर्मी की पूरी छुट्टियाँ अपने गांव में मनाऊंगा| मेरा गांव मुंबई से २०० किलोमीटर दूर है, वह सह्याद्रि पर्वत शृंखला में स्थित है| गर्मियोंमें वहां अच्छा मौसम रहता है|

गांव में मेरे चाचजीका घर है, घर के बाजू में ही आम, कोकम आदि के पेड़ है| जैसे ही में वहां पहुँचा मेरे गांव के दोस्त मुझे मिलने आयें| खाना होने के बाद हम लोग सीधे जंगल की तरफ गए| मैंने पेड़ से उतारे ताजा आम खाएं, हमने बहुत सारे काजू के फल भी जमा किये| मैं जब छोटा था इन्ही दोस्तों के साथ जंगल में घूमने और फल निकालने के लिए जाता था| अचानक मुझे उन सब यादोंने घेर लिया, मैं फिर एक बार वह दोस्ती महसूस कर रहां था| फिर हमने कच्चे बैर जमा किये, मेरी दादी उनकी बहुत बढ़िया चटनी बनाती है|

ऐसे करके मेरा पहला दिन बीत गया| उस रात हम लोग आँगन में सोये, जी हाँ गांव में अभीभी बहुत सारे लोक गर्मियों के मौसम में आँगन में सोते है| ऐ.सी. की हवा एक तरफ और प्रकृति की गोद में सोना एक तरफ, इनका कुछ मेल ही नहीं| उस दिन मुझे बहुत अच्छी नींद आयी| दूसरे दिन दोस्तों के साथ टहलते समय हम गांव के प्राथमिक विद्यालय के पास पहुँचे| मैंने देखा की वहां स्कूल में कम्प्यूटर्स बिठा रहें थे| मैं स्कूल के अंदर गया और इसके बारें में पुछा| वहांके एक प्राध्यापक में बताया की इस साल से वह लोग स्कूल में कंप्यूटर की शिक्षा देंगे| पर उनके पास सिखानेके लिए कोई शिक्षक नहीं है| कोई भी उस छोटेसे गांव में नहीं आना चाहता था|

मैंने कंप्यूटर का प्रशिक्षण लिया है और में बचपन से कंप्यूटर इस्तेमाल करता हूँ| तो फिर मैंने १५ दिन के लिए वहां कंप्यूटर क्लास लेने का प्रस्ताव रखा और उन्होंने वह स्वीकार किया| अगले १५ दिन मैंने वहांके बच्चोंको प्रशिक्षण दिया, मेरे दोस्त जो दसवीं कक्षा पूरी कर चुके थे उन्होंने भी प्रशिक्षण लिया| मैंने स्कूल का एक ऐन.जी.ओ. के साथ संपर्क करवाया जो कंप्यूटर,इंटरनेट शिक्षा के लिए स्वयंसेवी प्रशिक्षक भेजते है| आखरी कुछ दिनोंमे मैंने आपसपासके पर्यटन स्थल जैसे महाबलेश्वर और प्रतापगढ़ भी देखे|

यह गर्मी की छुट्टी मेरे लिए बहुत अलग थी| पहिली बार मैंने किसीके लिए कुछ किया, और मुझे बहुत अच्छा लगा| मेरे पास जो ज्ञान था वह किसीकी ज़िन्दगी बदल सकता था, जब मैंने वह ज्ञान बांटा तो मुझे उसका एहसास हुआ| मैंने अब ठान ली है जब भी मुझे वक्त मिलेगा, चाहे वह गर्मी या सर्दी की छुट्टी हो में उसे अपना ज्ञान बाटने में या किसी की मदत करनेमे इस्तेमाल करूंगा|

Essay How I Spent My Summer Vacation in Hindi

यहाँ मुंबई (आपके शहर) में ग्रीष्मकाल में पारा चढ़ता है, और यह बिल्कुल अच्छा अनुभव नहीं होता है। मैं गर्मी की छुट्टी फिल्मे देखके या वीडियो कंसोल के सामने बर्बाद नहीं करना चाहता था। अगले साल फिर वही पढाई, असाइनमेंट, प्रोजेक्ट, परीक्षा होगी… में फिर से व्यस्त हो जाऊंगा। मैं इन सब से अपने आप को दूर रखना चाहता था ताकि मैं ताजा और ऊर्जावान बनके नया साल शुरू कर सकूं।

इसलिए, मैंने अपने कुछ दोस्तों को उत्तर भारत की यात्रा की योजना बनाने के लिए मना लिया | १० में से ७ तैयार थे, अब अगली बड़ी अड़चन थी, अपने अपने माता-पिता की सम्मति लेना | बहुत सारे इंटरनेट शोध के बाद, हमने अपनी गर्मियों की छुट्टी के लिए कुलु-मनाली को चूना। हमने ७ दिनों की यात्रा की योजना बनाई| हमने हिमाचल प्रदेश में सभी संभावित नजदीकी स्थलों की यात्रा के लिए योजना को खुला रखा। रोहतांग पास, सोलांग घाटी, भृगु झील, हिमालयन नेशनल पार्क, तिब्बती मोंटेसरी भी योजना में थे।

अब इस ट्रिप का सबसे कठिन हिस्सा, केवल-मित्रों की यात्रा के लिए माता-पिता को आश्वस्त करना। हमारे समूह में ३ लड़कियां भी थीं, इसलिए अपने माता-पिता को समझाना सबसे मुश्किल काम था। उनकी चिंताएँ वास्तविक थीं, हिमाचल महिलाओं की सुरक्षा के लिए बहुत अच्छी जगह नहीं है; हम यह समाचार से जानते हैं। माता-पिता को मनाने और उनकी वास्तविक चिंताओं का सम्मान करने के लिए हम एक टूर कंपनी के साथ हिमाचल जाने का निश्चित किया।

हम में से कुछ मित्र यात्रा की योजना बनाने के लिए “हिमाचल एडवेंचर” नामक टूर एजेंसी गए और बैठक के ४५ मिनट के बाद, हमने एक किफायती डील (सौदा) की। भगवान का शुक्र है कि हमने ऐसा किया क्योंकि इससे हमारे बहुत सारे पैसे बच गए| उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था का आश्वासन दिया और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वे हमें दूसरे एक सम-आयु समूह का हिस्सा बनाने के लिए सहमत हुए। हम बहुत ही खुश थे।

हम सुबह मुंबई से दिल्ली के लिए हवाई जहाज से रवाना हुए, उसी दिन हमने मनाली के लिए एक वोल्वो बस ली। रात तक हम मनाली पहुँच गए, हमने उस रात आराम किया क्योंकि हम अगली सुबह को नए सिरे से शुरू करना चाहते थे। पहला गंतव्य रोहतांग दर्रा था, मैंने पहले डिस्कवरी चैनल पर रोहतांग पास पर एक वृत्तचित्र देखा था, इसलिए मुझे पता था कि यह वहां का सबसे अच्छा आकर्षण है। यह एक खतरनाक सड़क है जिसमें बहुत सारे बर्फ से भरे मोड़ हैं। जैसे-जैसे हम इसके करीब पहुंचते हैं, इसकी सुंदरता डर को ख़तम कर देती है, हम सब इसके सौंदर्य से आश्चर्यचकित थे। मैंने पहली बार बर्फ का अनुभव किया था, यह अनुभव बहुत ही रोमांचजनक था।

सोचिये हम लोगोंने उस बर्फ में सबसे पहला काम किया होगा? जी हाँ, बस से उतरते ही हम लोग एक दूसरे पर स्नोबॉल फेंक रहें थे; २० से २५ मिनट तो यहीं चल रहां था, वह अनुभव बहूतही मजेदार था। फिर हमने एक स्नोमैन भी बनाया है, काश कि मेरे पास स्नोमैन की नाक के लिए लाल गाजर होती। हमने स्नोमैन के साथ बहुत सारी ग्रुप सेल्फी, वीडियो ली। फिर हम स्कीइंग के लिए गए। अब तक मैंने इसे फिल्मों में और केवल यूट्यूब पर देखा था। स्कीइंग बहुत कठिन है, मैं उन स्केट्स पर ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था। हम में से कुछ ने स्की पर खड़े होकर इसका अभ्यास किया। लेकिन आखिर में, यह एक अविस्मरणीय अनुभव था|

उस शाम हम होटल वापस आ गए, रात को उन्होंने अलाव (बॉनफायर), फायर ग्रिल आदि की व्यवस्था की। हम ठंड में बाहर बैठे थे, अलाव के आसपास, साथ में गा रहे थे, मस्ती कर रहें थे। हमने वहां खाया, हमने एक-दूसरे के साथ कुछ अच्छा समय बिताया। होटल प्रबंधक ने हमें मोबाइल फोन स्विच ऑफ करने का सुझाव दिया ताकि हम उस गुलाबी मौसम का आनंद ले सकें। पहले हम यह विचार पसंद नहीं आया; लेकिन अंत में, हमने महसूस किया कि हमारे सोशल मीडिया की लत, सेल्फी की लत से दूर रहना बहुत महत्वपूर्ण है | हमें दोस्तों और परिवार के साथ अच्छा समय बिताना चाहिए। मैं सबसे अनुरोध करना चाहता हूँ ही हमें सोशल मीडिया से ब्रेक लेना चाहिए, जितना हो सके उतना। मैं यह भी नहीं मानता की इसे पूरी तरह बंद करना चाहिए, पर इंटरनेट उपयोग पे हमारा नियंत्रण होना चाहिए |

अगले दिन हमें कई स्थान देखने थे। होटल में नाश्ता करने के बाद, हमने अपना पर्वतीय ट्रेक शुरू किया। स्थानीय गाइड हमारे साथ थे, हमने लगभग १० किलोमीटर तक ट्रेक किया। यहां मुंबई (आपका शहर) में मैं मुश्किल से आधा किलोमीटर चलता हूं| मुझे नहीं पता नहीं मैंने १० किलोमीटर तक कैसे ट्रेकिंग की। शायद प्रकृति की सुंदरता, स्वच्छ हवा और मेरे दोस्तोंके साथ ने मुझे ऐसा करने के लिए प्रेरित किया। हम स्थानीय लोगों से भी मिले, वे हमें अपने घरोंमे आमंत्रित कर रहे थे। यह एक सुन्दर अनुभव था, यहां शहर में हम नए लोगों से मिलते जुलते नहीं, इससे उन्हें जानने का, उन्हें समझनेका मौका ही नहीं मिलता। मैं कह सकता हूं कि अब मैं प्रकृति और रिश्तों का अधिक सम्मान करता हूं। मैंने यह भी सीखा कि प्रदूषण मुक्त वातावरण बहुत महत्वपूर्ण है। ट्रेक से वापस आने के बाद हमने स्थानीय बाजारों में खरीदारी की, स्थानीय व्यंजनों (क्यूझिन) का लुफ्त उठाया।

अगले कुछ दिनों में हमने हिमालय के राष्ट्रीय उद्यान, तिब्बती मठ का दौरा किया। वह मठ शांत और आध्यात्मिक था। हम ६ दिन और ७ रात की यात्रा पे थे, लेकिन दिन ऐसे ही बीत गए समज ही नहीं आया। हम सभी सोच रहें थे की यह १५ दिनों की यात्रा होनी चाहिए थी। अगर आप कुलु, मनाली, हिमालय जैसे जगह जा रहें तो, कमसे कम १५ दिन निकालके ही जाइये| २ या ४ दिन में इन जगहोंकी सुन्दरता नहीं समेटी जा सकती|

हमने बहुत सारी मस्ती की, यहाँकि कुछ यादें और कहानियां हैं जो जीवन भर हमारे साथ रहेंगी। मस्ती के साथ-साथ यह मेरे लिए एक अलग अनुभव था। मैंने इस यात्रा से बहुत सारी चीजें सीखीं। अब मैं प्रकृति, स्वच्छ हवा की कीमत करता हूं, अब माता-पिता और दोस्तों के लिए मन में एक नया सम्मान है। यदि एक यात्रा इतनी मजेदार हो सकती है और एक ही समय मुझे इतने अनुभवों से समृद्ध कर सकती है तो मैं ऐसी यात्रा के लिए और अधिक बार जाना चाहता हूं। अगली बार, मैं दक्षिण भारत में माता-पिता के साथ शीतकालीन छुट्टी यात्रा की योजना बना रहा हूं।

Note: मैंने गर्मी की छुट्टी कैसे बिताई या गर्मी की छुट्टियां पर दिया यह हिंदी निबंध आपको पसंद आया हो तो हमें निचे अच्छी रेटिंग दीजिये| आप आपके गर्मी की छुट्टी में अनुभव भी कमेंट बॉक्स में शेयर कर सकतें है| Essay given here is suitable for school students of class 6,7,8,910 etc. We have also written a 10 lines essay which is good for students of class 2,3; the same article has another short essay on summer vacation which is good for 4,5 class students. Follow the given link to check it out. 10 Lines Short Essay on How I Spent My Summer Vacation

About the author

Ajay Chavan

"Cut from a different cloth"
I believe words have the power to change the world. So, here I am, determined to change the world and leave my mark on it, one word at a time.
A writer, amateur poet, ardent dog lover, Sanskrit & Urdu enthusiast, and a seeker of Hiraeth.

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