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महात्मा गाँधी हिंदी निबंध, भाषण – Mahatma Gandhi in Hindi

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प्रत्येक राष्ट्र ने समय-समय पर ऐसी प्रतिभाओं को जन्म दिया है, जिनके द्वारा राष्ट्रीय विकास की नींव गहरी हुई है और युगों तक उनके द्वारा बतलाए हुए मार्ग पर सामान्य जनता बड़े विश्वास और आत्म बल के साथ चलती रही है| इन सभी नेताओं के आत्म-बलिदान की कथा हमेशा ही इतिहास के पृष्ठों पर स्वर्ण अक्षरों में लिखती जाती रही है| इन सभी नेताओं का योग और शिक्षा का कार्य आगे आने वाली पीढ़ी को मार्गदर्शन करता आया है| इस निबंध में हमने महात्मा गांधीजी के महान कार्य पर निबंध लिखा है| इस निबंध से आप भाषण कर कर सकते है और लेख भी लिख सकते है|

महात्मा गाँधीजी के बारेमे निबंध, भाषण Mahatma Gandhi in Hindi

हमारे देश में १९ वी शती के ७ वे शतक में ऐसी एक महान प्रतिभा का उदय हुआ| इस प्रतिभाशाली पुरुष का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था| इनका जन्म २ अक्टूबर १८६९ के दिन गुजरात के पोरबंदर में हुआ था| महात्मा गाँधी एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे उन्होंने अपना पूरा जीवन भारत की आजादी के संघर्ष में बिताया| महात्मा गाँधी को उनके महान कार्यो और महानता के लिए “महात्मा” कहा जाता है जो की उन्होंने जीवन भर किया| इस महान कार्य की वजह से पुरे देश में २ अक्टूबर को महात्मा गाँधी जयंती मनाई जाती है| उनके पिता का नाम करमचंद गाँधी था और माता का नाम पुतलीबाई था| इनके पिता की आर्थिक स्थिति अच्छी थी| वह काठियावाड़ की एक छोटीसी रियासत के दीवान अर्थात प्रधानमंत्री थे और उनकी माता को धार्मिक विचारों में रस था| गांधीजी के जीवन में उनकी माता का बहुत प्रभाव रहा|

महात्मा गाँधी को हमारे देश की आजादी में उच्चतम योगदान की वजह से उन्हें “राष्ट्पिता” या “बापू” के नाम से जाना जाता है| गांधीजी भारत के एक महान और उत्कृष्ट व्यक्तित्व थे जो आज भी देश और विदेशों के लोगों को अपने महानता की विरासत, आदर्शवाद और महान जीवन की वजह से प्रेरित करते है| इन्होने अहिंसा और लोगों की एकता में विश्वास किया और भारतीय राजनीती में आध्यात्मिकता लायी| उन्होंने भारतीय समाज से छूताछूत को हटाने के लिए, भारत में पिछड़े वर्गों के उत्स्थान के लिए, सामाजिक विकास के लिए, गावों का विकास करने के लिए आवाज उठाई| भारतीय लोगों को स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया| कई सामाजिक प्रश्नों के लिए भी उन्होंने कठिन प्रयास किये| उन्होंने आम लोगों को राष्ट्रीय आंदोलन में सहभाग लेने के लिए सामने लाया और उनकी सच्ची स्वतंत्रता और देशप्रेम के लिए लड़ने के लिए उन्हें प्रेरित किया| उनके जीवन की कहानी हमारे लिए एक महान प्रेरणा है| उन दिनों बाल विवाह का प्रचलन था| गांधीजी का भी विवाह १३ वर्ष की आयु में कस्तूरबा जी से हुआ था|

महात्मा गांधीजी की शिक्षा

१८ वर्ष की आयु में ये बैरिस्टरी की पढाई करने के लिए जब इंग्लैंड जाने लगे तो इन के संबंधियों और जाती बिरादरी के लोगों ने इनको बड़ा विरोध किया| लेकिन किसी बात की चिंता किये बिना ये अपनी हठ पर अटल रहे और जलयान से इंग्लैंड के लिए रवाना हो गए और वकीली पेशे की शुरुवात की| उन्होंने जिंदगी में काफी मुसीबतों का सामना किया लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी वे हमेशा आगे बढ़ते रहे|उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा तिरस्कृत और अपमानित किये गए भारत के लोगों की मदद करना शुरू किया दिया| उन्होंने अंग्रेजों के अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए अहिंसा स्वतंत्रता आंदोलन शुरू कर दिया| उनका कई बार अपमान किया गया लेकिन उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष जारी रखा| १८९३ में गांधीजी दक्षिण अफ्रीका गए| वह गोर लोग प्रवासी भारतियों पर मनमाना अत्याचार करते थे| वहाँ इन्होंने नेताल में रह कर एक मुस्लिम कंपनी में काम करना शुरू कर दिया| नेताल में ये कुलियों के बैरिस्टर कहे जाते थे| लेकिन इस अपमान और उपेक्षापूर्ण शब्दों की इन्होंने कभी परवाह नहीं की और १४ वर्ष तक वही काम करते रहे|

महात्मा गांधीजी का राष्ट्रीय योगदान

उसके बाद १९१५ में गांधीजी भारत में लौटे| उस समय भारतवर्ष में तिलक,गोखले आदि नेताओं के द्वारा स्वतंत्रता का आंदोलन चलाया जा रहा था तब गांधीजी भी उसमे शामिल हुए| यही से गांधीजी का राजनैतिक जीवन आरंभ हुआ| भारत लौटने के बाद वह एक सदस्य के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस में शामिल हो गए| भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस में एक सदस्य के रूप में उन्होंने असहयोग आंदोलन, सिविल डिसओबेडिएंस मूवमेंट और बाद में भारत छोडो आंदोलन किये जो एक दिन सफल हो गए और इस संघर्ष से एक दिन भारत को स्वतंत्रता मिली| १९२१ का ‘नमक सत्याग्रह’, १९३०-३१ की गोलमेज सभाए, १९४२ का भारत छोडो आंदोलन आदि को गांधीजी के सफल नेता होने की कथा कहते है| इन्होंने राजनीती में सत्य और अहिंसा की शक्ति का परिक्षण किया|

गांधीजी के व्यक्तित्व में शांति और धैर्य धारण करने की असीम शक्ति थी| इन्ही के भगीरथ प्रयत्नों से ही हमें आजादी प्राप्त हुई| इसे गांधीजी का ही वैशिष्ट्य कहना होगा की उन्होंने अपने प्रभाव में आए कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ताओं को व्यवस्थित और अनुशासनपूर्ण जीवन अपनाने की प्रेरणा दी| आज इतने वर्षों के बाद भी गांधीजी के आदरहों पर चलने वाले, उससे बाल ग्रहण करने वाले तथा उनके आदर्शों को राजनीती में व्यवहार में लेन वाले लोगों की कमी हमारे देश में नहीं है|

१५ अगस्त १९४७ को हमें आजादी मिली| ३० जनवरी १९४८ को जब की आजादी के बाद के सैकड़ो काम होने बाकी थे, गोडसे नामक एक सिरफिरे ने गांधीजी को प्रार्थना सभा में गोली मार दी| गांधीजी ‘हे राम’ की उच्चारण करते हुए शांति के साथ इस लोक से चल बसे|वास्तव में महात्मा गाँधी महान थे| उनकी महानता की यश-गाथा युगों तक गाई जाती रहेगी|

अगर आपको महात्मा गांधीजी पर दिया हुआ निबंध या भाषण पसंद आया हो तो आप अपने विचार कमेंट सेक्शन में बता सकतें है|

About the author

Ajay Chavan

"Cut from a different cloth"
I believe words have the power to change the world. So, here I am, determined to change the world and leave my mark on it, one word at a time.
A writer, amateur poet, ardent dog lover, Sanskrit & Urdu enthusiast, and a seeker of Hiraeth.

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