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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ निबंध, भाषण हिंदी में | Essay on Beti Bachao, Beti Padhao

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28 अप्रैल 2018 का दिन हरियाणा की अनु कुमारी के लिए एक नया सवेरा लेकर आया था। उस दिन यूएपएससी द्वारा गजेटिड ऑफिसर के पद के लिए परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ था। इस परिणाम में अनु कुमारी ने देश भर में द्वितीय स्थान प्राप्त करके पूरे हरियाणा ही नहीं बल्कि समस्त नारी जगत को गौरव प्रदान किया था। अनु कुमारी की सफलता का इससे अच्छा परिणाम क्या हो सकता है की उसी दिन हरियाणा सरकार ने उन्हें बेटी-बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का ब्रांड एम्बेस्ड़र बना दिया था। इस घोषणा के साथ ही हमारे दिमाग की बत्ती जली और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के बारे में खोजबीन शुरू करी।

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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान हिंदी निबंध| Essay on Beti Bachao, Beti Padhao in Hindi

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान हिंदी निबंध| Essay on Beti Bachao, Beti Padhao in Hindi

क्या है  बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान?

परंपरा से यह सुनते आए हैं की एक पुरुष को शिक्षा दी जाये तो वह अपना और अपने परिवार के लिए लाभदायी होता है, लेकिन अगर एक नारी की शिक्षा दी जाये तो पूरा समाज और देश लाभ प्राप्त करता है। इसी प्राचीन सीख को ध्यान में रखते हुए भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को एक अभियान शुरू किया। इसे नाम दिया बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की आवश्यकता क्या है ?

दरअसल आजादी के 70 वर्ष बीतने के बाद भी भारत के समाज में पुरुष और महिला का अनुपात निरंतर असंतुलित चल रहा है। इस बात को 2011 की जनगणना के आंकड़ों से यह सिद्ध किया जा सकता है, जहां भारत के जनसंख्या अनुपात में प्रति 1000 पुरुषों में 940 महिलाएं हैं। जबकि यह अनुपात 2001 की जनगणना 1000 पुरुषों में 933 महिलाओं का था । सर्वे में यह भी देखा गया की कुछ राज्य जैसे दमन और द्विव जैसे राज्यों में यह अनुपात गिरकर 1000 पुरुषों के साथ 618 महिलाओं का भी है।

परिणाम यह हुआ की भावी पीढ़ी को आगे बढ़ाने के काम में रुकावट आती महसूस हुई क्यूंकी महिलाओं की संख्या के कम होने से भावी माता वर्ग के अनुपात में भी कमी आने लगी। दूसरी ओर लड़के की कामना के कारण कन्या भ्रूण हत्या के मामलों में लगातार तेजी आ रही है। मुख्य रूप से यह समस्या दहेज के दानव के कारण ज़ोर पकड़ती जा रही है। इसी कारण लड़कियों की शिक्षा पर भी खर्च करना कुछ माता-पिता को फिजूलखर्ची लगता है।

इस प्रकार यह देखते हुए की यह सभी समस्याएँ आपस में जुड़ी हुई हैं और इनका परिणाम भयंकर हो रहा है। इसलिए सुधार के रूप में सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की जरूरत महसूस हुई। (सुकन्या समृद्धि योजना के बारेमे पढ़ने के लिए लिंक फॉलो करें|)

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का इतिहास क्या है?

इस अभियान की शुरुआत हरियाणा राज्य के पानीपत नाम के शहर से किया गया। वास्तव में हरियाणा में लिंगानुपात 775 लड़कियां और 1000 लड़कों का है। इस अनुपात से महिला और पुरुष की गिनती  की असमानता और महिला वर्ग की दयनीयता को दिखाता है।

शुरू में  इस अभियान को पाइलट प्रोजेक्ट के रूप में हरियाणा के 12 जिलों में शुरू किया गया था। इसके बाद इन जिलों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ाते हुए पहले 100 और फिर बाद में 161 कर दी गई थी। अब इस अभियान में 244 जिलों को शामिल कर लिया गया है।

इन जिलों का चयन , उनमें स्त्री-पुरुष अनुपात में अत्याधिक असमानता के आधार पर किया गया था। मूल रूप से इस योजना का उद्देशय समाज में कन्या शिशु की सुरक्षा और शिक्षा के प्रति जागरूकता जगाना था।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान क्यूँ ज़रूरी है ?

जब माँ हैं प्यारी,बहन दुलारी, और बीवी हैं पटरानी

तो क्यूं करते हो बेटी से मक्कारी

जीवन हैं बेटी का अधिकार. शिक्षा हैं उसका आधार

बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ, अपनी सोच को आगे बढ़ाओ

भारतीय समाज में कुछ क्षेत्रों में रीति रिवाजों की आड़ में कन्या जन्म को बुरा समझा जाता था। इसलिए यदि कभी दुर्घटनावश किसी कन्या का जन्म हो जाता था, तो उसे तत्काल ही समाप्त कर दिया जाता था। इसके अतिरिक्त अधिकतर गांवों में लड़कियों की शिक्षा को गैरज़रूरी काम समझ कर या तो करवाया ही नहीं जाता या फिर उसे बीच में ही रोक कर घर और खेत के काम में लगा दिया जाता है। इसलिए कन्या जन्म और शिक्षा को प्राथमिकता पर लाने के लिए एक विशेष अभियान की जरूरत महसूस हुई। इस अर्थ में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के उद्देश्य हैं:

  1. कन्या भ्रूण हत्या को रोककर बालिका जन्म को बढ़ावा देना;
  2. बालिकाओं का भी शिक्षा प्राप्त करने का समान अधिकार है, इस सोच को सारे समाज में फैलाना;

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान में क्या विशेष है?

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है की इसको सही तरीके और सफलता पूर्वक चलाने के लिए भारत सरकार के चार मंत्रालाय मिलकर काम कर रहे हैं। परिवार कल्याण मंत्रालय, मानव संसाधन विकास महिला, बाल विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय एक साथ मिलकार इस योजना की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस योजना के सफल रूप से क्रियान्वन के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं स्थानीय सरकारों की हिस्सेदारी भी तय कर दी गई  है । इसके अतिरिक्त इस की योजना की, केंद्रीय व राज्य स्तरों के साथ जिलों के स्तर पर भी मॉनिटरिंग के लिए निम्न प्रावधान किए गए हैं:

  • राष्ट्रीय स्तर पर महिला एवं बाल विकास मन्त्रालय का नेशनल टास्क फोर्स सेक्रेटरी
  • राजकीय स्तर पर टास्क फोर्स सेक्रेटरी
  • जिला स्तर पर जिला कलेक्टर

इसके अलावा इस योजना की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  1. योजना के लिए चुने गांवों में “गुड्डा-गुड्डी” बोर्ड लगाए जाएँगे और हर महीने इस बोर्ड पर उस गांव के लड़के और लड़कियों की संख्या को दर्शाया जाएगा।
  2. ग्राम पंचायत हर परिवार में लड़की के जन्म पर उपहार भेजेगी।
  3. संबन्धित गांव की पंचायत, वर्ष में कम से कम सात लड़कियों के जन्मदिन को मनाएगी।
  4. इस योजना को बढ़ावा देने में लगे हुए लोगों का सम्मान करने के अतिरिक्त गांव की पंचायत, लड़कियों के जन्म का रजिस्ट्रेशन करने का काम भी करेगी।
  5. गांव पंचायत के सभी सदस्यों को ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान’ की शपथ दिलवाई जाएगी।
  6. अगर किसी गांव में लड़कों के मुक़ाबले लड़कियों की संख्या में बढ़ोतरी होती है तो उस गांव की पंचायत का सम्मान किया जाएगा।
  7. गांव में अगर बाल विवाह की घटना होती है तो इसके लिए ग्राम प्रधान को जिम्मेदार माना जाएगा।
  8. कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपराध को रोकने और इस संबंध में गांवों में जागरूकता फैलाने के लिए इलाके के स्कूल और कॉलेज जैसी शिक्षा संस्थानों को इस अभियान में शामिल किया जाएगा।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान में क्या मिल रहा है?

  1. संकट प्रबंधन:

इस योजना के अंतर्गत जिलों में इस प्रकार के केंद्र की स्थापना की जाएगी जहां महिलाएं किसी प्रकार की विपत्ति या आकस्मिक संकट की सूचना दे सकें। सूचना मिलते ही केंद्र की ओर से संबन्धित महिला को जरूरत के अनुसार मदद देने का कार्य भी केंद्र द्वारा किया जाएगा।

  1. सामाजिक जागरूकता:

साधारण रूप में सरकार द्वारा बनाई गई विभिन्न योजनाओं और स्कीम के बारे में लोगों को अधिक पता नहीं होता है। इसलिए सरकार द्वारा इस योजना को सब लोगों तक सही रूप में पहुंचाने के लिए अलग-अलग प्रचार माध्यमों का प्रयोग किया है। इसके लिए विज्ञापन, पोस्टर, स्लोगन आदि का सहारा लिया है। इससे यह उम्मीद की जाती है की समाज में इस योजना के प्रति लोगों में जागरूकता आएगी।

  1. बेटी की सुरक्षा:

देश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों को देखते हुए इस योजना में महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए लगभग 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है जिससे महिलाओं के लिए विशेष ट्रांसपोर्ट सुविधा का इंतेजाम किया जाएगा।

  1. एलार्म बटन:

महिलाओं की सुरक्षा के लिए किए जाने वाली कोशिशों में एक और कोशिश है : अलार्म बटन का उपयोग। यह बटन या एप है जिसके माध्यम से कोई भी वह महिला जो मदद लेना चाहती है, इसके माध्यम से अपना संदेश्, चित्र या वॉयस मेसेज भेज सकती है ।

  1. सुकन्या समृद्धि योजना:

इस योजना का सबसे ठोस कदम सुकन्या समृद्धि योजना का लागू करना है। इसके अंतर्गत परिवार में कन्या जन्म पर उसके 21 वर्ष पूरे होने तक के लिए धन राशि जमा करने का प्रावधान किया गया है। इससे लड़कियों की शिक्षा और उनके परवरिश में परिवार को बहुत बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के लिए एप्लाई कैसे करें:

आइये अब आपको “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान” का हिस्सा बनने के लिए क्या करना होगा, इसकी जानकारी विस्तार से बताते हैं:

  1. बेटी के नाम का बैंक खाता:

सबसे पहले आपको अपनी बेटी के नाम से किसी भी बैंक में एक एकाउंट खुलवाना होगा। इस काम के लिए देश के लगभग सभी बैंक आपको एकाउंट खोलने की सुविधा देते हैं।

  1. सुकन्या समृद्धि योजना:

अब आपको इस योजना के अंतर्गत चलाई जाने वाली दूसरी योजना “सुकन्या समृद्धि योजना” के लिए बैंक से एप्लिकेशन फॉर्म लेना होगा। इस फॉर्म के साथ बताए गए डोक्यूमेंट्स को लगा कर बैंक में जमा कर दीजिये। इस योजना में आपको इस एकाउंट में जमा धन राशि पर 9.1% की दर से ब्याज दिया जाएगा।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के लाभ क्या हैं?

इस अभियान के बारे में जानने के बाद अब आप इसके फ़ायदों के बारे में भी अच्छी तरह से जान लें। वैसे तो इस अभियान के कोई वित्तीय लाभ नहीं हैं। लेकिन इस अभियान को लागू करके सरकार ने समाज की लड़कियों के प्रति पुरानी सोच को बदलने का साहसिक काम किया है। इस योजना के माध्यम से लड़कियों भी लड़कों की भांति आर्थिक और शैक्षिक रूप से सशक्त हो सकती हैं। आइये देखें यह किस प्रकार संभव है:

  1. इस अभियान में लड़कियों की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है। यह आर्थिक सहायता लड़कियों की पढ़ाई पूरे होने तक दी जाती है।
  2. इस योजना के अंतर्गत लड़कियों के विवाह के लिए भी परिवार को आर्थिक सहायता दी जाती है।
  3. अभियान के अंतर्गत महिला समाज की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है।
  4. पुरुष और महिला के बीच का सामाजिक अंतर को दूर करने का प्रयास करना।
  5. परिवार और समाज में बेटे और बेटी के भेदभाव को कम करने के लिए जागरूकता पैदा करना।
  6. इस अभियान की मदद से लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के सभी प्रयत्न किए जा रहे हैं।
  7. समाज में लड़कियों के प्रति सांजीक सोच बदलने के लिए आसानी से समझ आने वाले नारों का प्रयोग किया जा रहा है। उदाहरण के लिए :

‘’ प्रॉपर्टी एवं वसीयतों में बेटों के साथ बेटियों का भी नाम’’

‘’ बेटियां भी बेटियों से ज्यादा बेहतर पढ़ सकती हैं’’

‘’ बेटियां भी बेटों से ज्यादा नाम कमा सकती हैं’’

‘’ बेटियां भी नौकरी पा सकती है’’

  1. इस योजना के प्रचार और प्रसार के कारण कन्या भ्रूण हत्या में कमी आई है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की सीमाएं

भारत सरकार द्वारा कन्या भ्रूण व महिला समाज की सुरक्षा के लिए चलाई जाने वाली बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान में कुछ कमियाँ भी हैं। जैसे :

  1. कन्या भ्रूण की हत्या को रोकने के लिए जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इस घटना के घटने पर किसी प्रकार के सख्त कानून की व्यवस्था नहीं है।
  2. लड़कियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के लिए धन की व्यवस्था की जा रही है। लेकिन वास्तव में कितनी लड़कियां इस धन की सहायता से विध्यालय या आगे की पढ़ाई पूरी कर रही हैं, इसपर कोई निगरानी नहीं है।
  3. गांवों में व ब्लॉक लेवेल पर इस योजना को लागू करने के कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
  4. इस योजना के लिए आधिकारिक सहायता अधिक नहीं मिल पाती है। इसका मुख्य कारण बड़े अधिकारियों के नियमित होने वाले ट्रांसफर हैं। इस कारण नया आने वाला अधिकारी इस योजना से पूरी तरह से जुड़ नहीं पाता है।
  5. जो लड़कियां इस योजना की सहायता से पढ़ती हैं तो उन्हें या उनके परिवार को सम्मानित करने की कोई व्यवस्था नहीं है।

निष्कर्ष

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान समाज में लड़कियों के प्रति जागरूकता जगाने का एक अनूठा प्रयास है। इस योजना को लागू करने में आने वाली परेशानियाँ इतनी बड़ी नहीं हैं की उन्हें दूर न किया जा सके। इस प्रकार आइये इस योजना को मिलकर सफल बनाने का प्रयास करें।

में आशा करता हु आपको यह लेख तथा निबंध पसंद आया हो कृपया निचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय दे. धन्यवाद. 🙂

About the author

Ajay Chavan

"Cut from a different cloth"
I believe words have the power to change the world. So, here I am, determined to change the world and leave my mark on it, one word at a time.
A writer, amateur poet, ardent dog lover, Sanskrit & Urdu enthusiast, and a seeker of Hiraeth.

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